छात्र मानसिक स्वास्थ्य केंद्र

लंबे घंटे की पढ़ाई, प्रतियोगिता, घर से दूरी और रिज़ल्ट की अनिश्चितता युवाओं पर असली दबाव डालते हैं। तनाव सामान्य है — पर जब यह नींद, मूड, सेहत या पढ़ने की क्षमता पर असर डालने लगे, तो इसकी भी किसी दूसरी बीमारी की तरह देखभाल ज़रूरी है।

परामर्श गोपनीय है और हॉस्टल या PG के कमरे से वीडियो पर हो सकता है। समय पर मदद माँगना समझदारी है, कमज़ोरी नहीं।

हर समूह के लिए मार्गदर्शन

छात्रों के लिए (स्कूल, कोचिंग, कॉलेज)

  • 7–8 घंटे की नींद और उठने का तय समय बनाए रखें — याद की गई चीज़ें नींद में ही पक्की होती हैं।
  • ध्यान से पढ़ने के छोटे हिस्से (लगभग 45–50 मिनट) और बीच में छोटे ब्रेक; पढ़ते समय फ़ोन दूसरे कमरे में रखें।
  • ख़ुद की तुलना अपने पिछले टेस्ट से करें, सोशल मीडिया के टॉपरों से नहीं।
  • रोज़ थोड़ा चलना-फिरना — 20 मिनट की सैर भी — घबराहट कम करता है और ध्यान बढ़ाता है।
  • किसी भरोसेमंद से बात करें। उदासी, घबराहट या ख़राब नींद दो हफ़्ते से ज़्यादा रहे तो परामर्श लें।
  • संभलने के लिए "एनर्जी" की गोलियाँ, नींद की गोलियाँ या नशे से बचें — इनसे नींद, याददाश्त और मूड और बिगड़ते हैं।

अभिभावकों के लिए

  • "कितने नंबर आए?" से पहले "कैसा महसूस कर रहे हो?" पूछें। बच्चे तभी खुलते हैं जब उन्हें अपनापन लगे।
  • बदलाव पर ध्यान दें: अलग-थलग रहना, चिड़चिड़ापन, खाना न खाना, दिन-रात सोना या जागना, गिरते नंबर, बोझ होने की बातें।
  • साफ़ बताएँ कि उनकी क़ीमत एक परीक्षा से तय नहीं होती; रिज़ल्ट से पहले शांति से दूसरे विकल्पों पर बात करें।
  • लंबे भाषण से ज़्यादा नियमित छोटी बातचीत असर करती है। सलाह से ज़्यादा सुनें।
  • आत्महत्या की कोई भी बात आपात स्थिति है — उनके साथ रहें, ख़तरनाक चीज़ें हटाएँ और 14416 या 112 पर कॉल करें।

MBBS और NEET-PG छात्रों के लिए

  • मेडिकल पढ़ाई में भारी सिलेबस, परीक्षाएँ, रात की ड्यूटी और पीड़ा का सामना होता है। कभी-कभी बहुत भारी लगना आम है।
  • NEET-PG की तैयारी व्यावहारिक रोज़ के लक्ष्य और हफ़्ते में एक आराम के समय के साथ करें; लंबे समय की नियमितता लंबे-लंबे दिनों से बेहतर है।
  • नींद की गोलियाँ, स्टिमुलेंट या एंटीडिप्रेसेंट ख़ुद से कभी न लें। आसानी से मिलने के कारण मेडिकल छात्रों में यह असली जोखिम है।
  • मनोचिकित्सक से परामर्श गोपनीय है और इससे आपके रजिस्ट्रेशन या करियर पर असर नहीं पड़ता।

रेज़िडेंट डॉक्टरों और युवा प्रोफ़ेशनल्स के लिए

  • लंबे ड्यूटी घंटे, नींद की कमी और कार्यस्थल के तनाव से बर्नआउट, डिप्रेशन और नशे का जोखिम बढ़ता है।
  • बर्नआउट के शुरुआती लक्षण: भावनात्मक थकान, मरीज़ों के प्रति रूखापन, ख़ुद को बेअसर महसूस करना, काम से डर लगना।
  • रात की ड्यूटी के बाद नींद बचाएँ, ठीक से खाना खाएँ और हर हफ़्ते कम से कम एक निजी रिश्ते से जुड़ें।
  • वीडियो परामर्श ड्यूटी रोस्टर के हिसाब से तय किया जा सकता है।

छात्रों से जुड़े विषय

चेतावनी के संकेत — जल्द मदद लें

  • मौत, बोझ होने या "कोई रास्ता नहीं" की बातें करना या लिखना
  • कई रातें न सोना, या दिन का ज़्यादातर समय सोना
  • खाना, क्लास या घर पर फ़ोन बंद कर देना
  • शराब, गोलियाँ, गांजा या दूसरे नशे की नई शुरुआत
  • परीक्षा से पहले या दौरान घबराहट के दौरे
  • सामान बाँट देना या अलविदा कहना

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मेरे परामर्श के बारे में घरवालों या कॉलेज को बताया जाएगा?

परामर्श गोपनीय है। जानकारी आपकी सहमति से ही साझा होती है — सिवाय तब, जब आपकी जान को गंभीर ख़तरा हो और सुरक्षा के लिए परिवार को शामिल करना ज़रूरी हो।

क्या दवाओं से नींद आएगी और पढ़ाई पर असर पड़ेगा?

कई छात्रों को सिर्फ़ काउंसलिंग और दिनचर्या में बदलाव की ज़रूरत होती है। दवा ज़रूरी हो तो पढ़ाई के हिसाब से चुनी जाती है और नींद आने पर बदली जाती है।

क्या कोटा या किसी और शहर के हॉस्टल से परामर्श ले सकते हैं?

हाँ। परामर्श निजी वीडियो कॉल से होता है। ऐसा समय चुनें जब आप खुलकर बात कर सकें।

अगर आप या आपका कोई जानने वाला आत्महत्या के बारे में सोच रहा है, तो अभी Tele-MANAS 14416 (निःशुल्क, 24×7) या 112 पर कॉल करें।