नशा मुक्ति — अब छुटकारा संभव है
शराब · अफ़ीम · डोडा पोस्त · स्मैक · हेरोइन · गांजा · तंबाकू · नशे की गोलियाँ · मोबाइल और सट्टा
नशा दिमाग़ की बीमारी है। जैसे डायबिटीज़ का इलाज दवा से होता है, वैसे ही नशे का इलाज दवाओं, काउंसलिंग और सहारे से होता है — शर्म, ज़बरदस्ती या बिना प्रमाण के नुस्ख़ों से नहीं।
ज़्यादातर मरीज़ों का इलाज बिना भर्ती के होता है, कई का घर बैठे वीडियो परामर्श से।
8+
वर्षों का क्लिनिकल अनुभव
14,000+
मरीज़ों का इलाज
4.5/5★
मरीज़ों की रेटिंग
डॉ. कुलदीप बुडानिया · MBBS, MD Psychiatry · सीनियर स्पेशलिस्ट
किन-किन नशों का इलाज होता है?
- शराबदारूरोज़ पीना, सुबह की तलब, हाथ काँपना। सुरक्षित डॉक्टरी डिटॉक्स।अचानक छोड़ना ख़तरनाकऔर जानें
- अफ़ीम / डोडा / स्मैकओपिऑइडछोड़ने पर बदन दर्द, दस्त। आरामदायक डिटॉक्स और लंबे समय की दवाएँ।और जानें
- तंबाकू / गुटखाबीड़ी, सिगरेट, खैनीनिकोटिन रिप्लेसमेंट और दवाओं से छोड़ने की सफलता दोगुनी।और जानें
- गांजा / चरस / भांगकैनबिसयुवाओं में मनोविकृति शुरू कर सकता है। काउंसलिंग और इलाज।और जानें
- नशे की गोलियाँ / कफ़ सिरपनींद की गोली, दर्द निवारक, कफ़ सिरपनिगरानी में धीरे-धीरे कमी — अचानक कभी न छोड़ें।और जानें
- मोबाइल, गेमिंग और सट्टाव्यवहारिक लतनशे जैसा ही दिमाग़ी असर। CBT और परिवार की योजना।और जानें
हर नशे पर विस्तृत जानकारी
- शराब की लत
- अफ़ीम की लत
- डोडा पोस्त की लत
- स्मैक (ब्राउन शुगर) की लत
- हेरोइन की लत
- गांजा और भांग की लत
- चरस (हशीश) की लत
- तंबाकू और गुटखा
- निकोटीन की लत (सिगरेट, वेप, पाउच)
- डॉक्टरी दवाओं की लत
- नींद की गोलियों (सेडेटिव) की लत
- इनहेलेंट का नशा (व्हाइटनर, गोंद, पेट्रोल)
- गेमिंग की लत
- सट्टा और जुआ
- मोबाइल और इंटरनेट की लत
- रिलैप्स प्रिवेंशन काउंसलिंग (नशा)
3 चरणों में इलाज
- 1
चरण 1 · शुरुआती दिन से 2 हफ़्ते
जाँच और डिटॉक्स (विषहरण)
नशे का पूरा इतिहास, शारीरिक जाँच और ख़ून की जाँच, फिर ऐसी दवाएँ जिनसे विदड्रॉल सुरक्षित और आरामदायक रहे।
- विदड्रॉल की स्कोरिंग और निगरानी
- शराब के लिए विटामिन B1
- ज़रूरत पर लिवर, HIV/हेपेटाइटिस जाँच
- 2
चरण 2 · 1–6 महीने
तलब (क्रेविंग) पर नियंत्रण
डिटॉक्स के बाद सबसे बड़ी चुनौती तलब है। दवाएँ दिमाग़ के इनाम-तंत्र पर काम करके तलब कम करती हैं, साथ में काउंसलिंग।
- उपयुक्त होने पर तलब कम करने वाली दवाएँ (शराब)
- उपयुक्त होने पर सब्स्टिट्यूशन थेरेपी या तलब कम करने वाली दवाएँ (अफ़ीम/स्मैक)
- निकोटिन रिप्लेसमेंट और दवाएँ (तंबाकू)
- प्रेरक काउंसलिंग और CBT
- 3
चरण 3 · 6–12 महीने और आगे
दोबारा नशा न हो
ठीक होने का मतलब है नई दिनचर्या। हम ट्रिगर — लोग, जगहें, भावनाएँ — पहचानते हैं और उनसे निपटने के कौशल बनाते हैं।
- HALT: भूखे, गुस्से में, अकेले या थके न रहें
- नशे की पेशकश पर 'ना' कहना — सत्रों में अभ्यास
- परिवार थेरेपी और नियमित फॉलो-अप
- डिप्रेशन, घबराहट और नींद की समस्या का इलाज
परिवार के लिए मार्गदर्शन
"घर में कोई नशे का आदी है — क्या करें?"
कदम 1
होश में हों तब बात करें
नशे में बहस न करें। शांति से, दोष देने के बजाय फ़िक्र के साथ बात करें।
कदम 2
पहले ख़ुद डॉक्टर से बात करें
परिवार मरीज़ के बिना भी परामर्श लेकर तरीका तय कर सकता है।
कदम 3
CRAFT तरीका अपनाएँ
कम्युनिटी रीइन्फ़ोर्समेंट एंड फ़ैमिली ट्रेनिंग — होश वाले व्यवहार की तारीफ़ करें, नशे के नतीजे उसे ख़ुद झेलने दें। कई परिवार इसी तरह मरीज़ को इलाज तक ले आते हैं।
कदम 4
नशे में मदद न करें
नशे के लिए पैसे देना या उसके नतीजों पर पर्दा डालना प्यार नहीं — इससे लत बनी रहती है। सही सीमाएँ तय करें।
कदम 5
चोरी-छिपे दवा कभी न दें
खाने में छिपाकर 'नशा छुड़ाने की दवा' देना ख़तरनाक हो सकता है। इलाज डॉक्टर की देखरेख और यथासंभव मरीज़ की सहमति से हो।
ख़तरे के संकेत — तुरंत मेडिकल मदद लें (112)
शराब छोड़ने के बाद दौरे
आमतौर पर आख़िरी पैग के 6–48 घंटे बाद।
भ्रम, चीज़ें दिखना, तेज़ काँपना (DTs)
डिलीरियम ट्रेमेंस का इलाज न हो तो जान को ख़तरा हो सकता है।
अफ़ीम/स्मैक का ओवरडोज़
बेहोशी, बहुत धीमी साँस, नीले होंठ — 112 पर कॉल करें।
आत्महत्या के विचार
Tele-MANAS 14416 (24×7, निःशुल्क) या 112 पर कॉल करें।
इमरजेंसी या आत्महत्या के विचार: 112 या Tele-MANAS 14416 (24×7, निःशुल्क) पर कॉल करें।
भ्रम बनाम सच
भ्रम
"बस इच्छाशक्ति से छोड़ दो — डॉक्टर की क्या ज़रूरत?"
सच
नशा दिमाग़ के रसायन बदल देता है। अकेली इच्छाशक्ति अक्सर नाकाम रहती है; डॉक्टरी इलाज से सफलता बहुत बढ़ती है।
भ्रम
"डॉक्टर को बताया तो पुलिस केस बन जाएगा।"
सच
मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के तहत इलाज गोपनीय है। इलाज लेने वाले मरीज़ की जानकारी डॉक्टर पुलिस को नहीं देते।
भ्रम
"दवाओं से नशा छुड़ाना मतलब एक नशे की जगह दूसरा।"
सच
सब्स्टिट्यूशन और तलब कम करने वाली दवाएँ WHO की आवश्यक दवाओं की सूची में हैं और निगरानी में नियंत्रित डोज़ में दी जाती हैं।
भ्रम
"अफ़ीम तो बड़े-बुज़ुर्ग भी खाते थे — क्या समस्या है?"
सच
रोज़ की निर्भरता, विदड्रॉल और सेहत व परिवार को नुकसान — यह बीमारी है, और इसका इलाज संभव है।
भ्रम
"झाड़-फूँक या ताबीज़ से छूट जाएगी।"
सच
नशा एक न्यूरो-बायोलॉजिकल बीमारी है। वैज्ञानिक इलाज काम करता है; देर करने से मुश्किल बढ़ती है।
भ्रम
"एक बार नशेड़ी, हमेशा नशेड़ी।"
सच
सही इलाज और सहारे से बहुत से लोग लंबे समय तक नशा-मुक्त रहते हैं।
आपकी गोपनीयता — हमारी ज़िम्मेदारी
- मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के तहत सुरक्षित
- आपकी अनुमति के बिना परिवार, नौकरी या किसी को कुछ नहीं बताया जाता
- निजी वीडियो परामर्श — किसी को पता चलने की ज़रूरत नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नशा मुक्ति में कितना समय लगता है?
डिटॉक्स कुछ दिन से दो हफ़्ते; तलब नियंत्रण और दोबारा नशा न होने का इलाज आमतौर पर 6–12 महीने।
क्या भर्ती होना ज़रूरी है?
आमतौर पर नहीं। भर्ती की सलाह सिर्फ़ गंभीर विदड्रॉल, दौरे, भ्रम या दूसरे मेडिकल ख़तरे में।
इलाज का ख़र्च कितना है?
परामर्श ₹500; दवाओं और जाँच का ख़र्च व्यक्तिगत योजना पर निर्भर। आर्थिक कठिनाई में छूट उपलब्ध।
क्या नशे के साथ डिप्रेशन का भी इलाज होता है?
हाँ — दोनों का साथ इलाज करने से सुधार बेहतर होता है।
नई ज़िंदगी की शुरुआत एक कॉल से हो सकती है।
नशा कोई भी हो, कितना भी पुराना हो — इलाज काम करता है। पहला कदम आपका है।
