ख़ुद को नुकसान पहुँचाना आमतौर पर भारी भावनाओं से निपटने का तरीक़ा होता है। यह परेशानी का संकेत है जिसे देखभाल चाहिए, सज़ा नहीं।
हर घटना को गंभीरता से लेना और विशेषज्ञ से जाँच कराना चाहिए।
मुख्य बातें
- शांत रहें; ग़ुस्से से छिपाना बढ़ता है
- पहले शारीरिक चोट का इलाज
- थेरेपी भावनाएँ सँभालने के सुरक्षित तरीक़े सिखाती है
लक्षण और संकेत
- बिना वजह कटने, जलने या चोट के निशान
- गर्मी में पूरी बाँह के कपड़े, शरीर छिपाना
- अलग-थलग रहना, उदासी, फ़ोन को लेकर छिपाव
कारण
- डिप्रेशन, घबराहट, भावनात्मक अस्थिरता
- बुलिंग, रिश्ते की समस्या, पढ़ाई का दबाव
- दुर्व्यवहार या आघात
जोखिम कारक
- पहले ख़ुद को नुकसान
- ऑनलाइन ख़ुद को नुकसान वाला कंटेंट
- नशा
प्रमाण-आधारित प्रबंधन
- कहें: 'मुझे ख़ुशी है कि तुमने बताया; हम मिलकर मदद लेंगे'
- घर में दवाएँ और नुकीली चीज़ें सुरक्षित रखें
- कुछ दिनों में मानसिक स्वास्थ्य जाँच
- थेरेपी (CBT, DBT स्किल्स) और परिवार का साथ
विशेषज्ञ से कब मिलें
- कोई भी ओवरडोज़ या गंभीर चोट — अभी इमरजेंसी (112)
- आत्महत्या या योजना की बात — उसी दिन
- टेली-मानस 14416 24×7 उपलब्ध
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ख़ुद को नुकसान ध्यान खींचने के लिए होता है?
यह असली परेशानी का संकेत है; अगर यह बात कहने का तरीक़ा भी हो, तो भी इसे देखभाल वाली प्रतिक्रिया चाहिए।
क्या मैं किशोर का शरीर बार-बार जाँचूँ?
इसके बजाय किशोर और थेरेपिस्ट के साथ सुरक्षा योजना बनाएँ; ज़बरदस्ती जाँच से भरोसा टूट सकता है।
चिकित्सा संदर्भ
इस लेख के लिए उपयोग किए गए दिशानिर्देश और आधिकारिक स्रोत।
- Self-harm: assessment, management and preventing recurrence (NG225). NICE, UK, 2022.
- Mental health of adolescents — fact sheet. World Health Organization.
- Tele-MANAS — National Tele Mental Health Programme. Ministry of Health and Family Welfare, Government of India.
- लेखक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MBBS, MD Psychiatry
- चिकित्सा समीक्षक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MD Psychiatry
- अंतिम समीक्षा
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
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