सीखने की ख़ास कठिनाइयाँ सामान्य बुद्धि और पढ़ाई के बावजूद पढ़ने (डिस्लेक्सिया), लिखने या गणित पर असर डालती हैं।
इन्हें अक्सर आलस समझा जाता है। जल्दी पहचान से आत्मसम्मान बचता है।
मुख्य बातें
- बुद्धि आमतौर पर सामान्य होती है
- ख़ास तरह से पढ़ाना मदद करता है
- प्रमाणपत्र से परीक्षा में सुविधाएँ मिल सकती हैं
लक्षण और संकेत
- अक्षरों और ध्वनियों को जोड़ने में कठिनाई; धीमा पढ़ना
- 7–8 साल के बाद भी बार-बार स्पेलिंग की ग़लती, अक्षर उलटना
- मेहनत के बावजूद संख्याओं में दिक़्क़त
कारण
- दिमाग़ भाषा या संख्याओं को कैसे समझता है, उसमें अंतर
- अक्सर परिवार में चलता है
- ख़राब पढ़ाई या आलस से नहीं
जोखिम कारक
- पारिवारिक इतिहास
- ADHD (ध्यान की कमी और अति-सक्रियता)
- शुरुआती सालों में बोलने और भाषा में देरी
प्रमाण-आधारित प्रबंधन
- आँख और कान की जाँच; साइको-एजुकेशनल जाँच
- विशेष शिक्षक के साथ उपचारात्मक पढ़ाई
- स्कूल में सुविधाएँ: अतिरिक्त समय, बोर्ड नियमों के अनुसार रीडर या राइटर
- साथ के ADHD या घबराहट का इलाज
विशेषज्ञ से कब मिलें
- पढ़ने या लिखने में सहपाठियों से बहुत पीछे
- होमवर्क से बचना, कम आत्मविश्वास
- बच्चे को शामिल करने से पहले माता-पिता चिंताओं पर बात करने के लिए पहले परामर्श बुक कर सकते हैं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या डिस्लेक्सिया ठीक हो सकता है?
यह ज़िंदगी भर रहता है, पर सही तरीक़े से पढ़ाने पर ज़्यादातर बच्चे पढ़ना सीखते और सफल होते हैं।
परीक्षा में मदद के लिए कौन सा प्रमाणपत्र चाहिए?
बोर्ड के अनुसार नियम अलग हैं; आमतौर पर अधिकृत केंद्र से जाँच रिपोर्ट चाहिए।
चिकित्सा संदर्भ
इस लेख के लिए उपयोग किए गए दिशानिर्देश और आधिकारिक स्रोत।
- ICD-11 for Mortality and Morbidity Statistics. World Health Organization.
- The Rights of Persons with Disabilities Act, 2016. Government of India.
- लेखक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MBBS, MD Psychiatry
- चिकित्सा समीक्षक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MD Psychiatry
- अंतिम समीक्षा
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
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