प्रॉब्लम-सॉल्विंग थेरेपी WHO की mhGAP गाइडेंस में सुझाई गई छोटी, व्यावहारिक थेरेपी है।
यह बड़ी समस्याओं को छोटे, संभव क़दमों में बाँटने में मदद करती है।
मुख्य बातें
- जो बदल सकते हैं और जो नहीं, उन्हें अलग करें
- पहले बिना आँके विचार सोचें
- परफ़ेक्ट योजना से छोटा क़दम बेहतर
लक्षण और संकेत
- भारी लगना और फ़ैसले टालना
- समस्याओं के बारे में घूम-फिर कर सोचना
- व्यावहारिक तनाव से जुड़ी उदासी
कारण
- एक साथ कई तनाव — पैसा, परिवार, काम
- निपटने की क्षमता पर कम भरोसा
- डिप्रेशन से ऊर्जा और ध्यान में कमी
जोखिम कारक
- जीवन में बड़े बदलाव
- अकेलापन और सहारे की कमी
- निपटने के लिए शराब
प्रमाण-आधारित प्रबंधन
- 1. एक समस्या साफ़-साफ़ लिखें
- 2. सभी संभव हल लिखें; 3. फ़ायदे-नुकसान तौलें
- 4. एक चुनें और क़दम तय करें; 5. अमल करें
- 6. समीक्षा: क्या काम किया, आगे क्या?
विशेषज्ञ से कब मिलें
- थेरेपी आपकी स्थिति के लिए सही है या नहीं, इस पर बात करने के लिए परामर्श बुक कर सकते हैं
- कोशिश के बावजूद समस्याएँ निराशाजनक लगें
- ख़ुद को नुकसान के विचारों में तुरंत मदद चाहिए, इंतज़ार नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगर समस्या हल न हो सके तो?
तब भावनाओं से निपटने और सहारा ढूँढने पर ध्यान — वह भी एक हल है।
प्रॉब्लम-सॉल्विंग थेरेपी में कितना समय लगता है?
अक्सर 4–8 सत्र।
चिकित्सा संदर्भ
इस लेख के लिए उपयोग किए गए दिशानिर्देश और आधिकारिक स्रोत।
- mhGAP Intervention Guide for mental, neurological and substance use disorders in non-specialized health settings, version 2.0. World Health Organization, 2016.
- LIVE LIFE: an implementation guide for suicide prevention in countries. World Health Organization, 2021.
- लेखक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MBBS, MD Psychiatry
- चिकित्सा समीक्षक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MD Psychiatry
- अंतिम समीक्षा
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
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