माइंडफ़ुलनेस का मतलब है विचारों, भावनाओं और शरीर की अनुभूतियों को जैसे हैं वैसे देखना, उनमें बहे बिना।
यह ध्यान की परंपराओं से आता है और MBCT और DBT जैसी थेरेपी में इस्तेमाल होता है।
मुख्य बातें
- मन भटकेगा — ध्यान देना और लौटना ही अभ्यास है
- कभी-कभार लंबे सत्र से रोज़ का छोटा अभ्यास बेहतर
- माइंडफ़ुलनेस-आधारित थेरेपी डिप्रेशन की वापसी घटाती है
लक्षण और संकेत
- लगातार ज़्यादा सोचना
- ग़ुस्से या घबराहट में जल्दी प्रतिक्रिया
- दिन भर 'ऑटोपायलट' पर चलना
कारण
- व्यस्त, मल्टीटास्किंग जीवनशैली
- डिप्रेशन और चिंता में बार-बार सोचने की आदत
- लगातार डिजिटल उत्तेजना
जोखिम कारक
- लंबा तनाव
- पहले डिप्रेशन के दौर
- नशा-मुक्ति में तलब
प्रमाण-आधारित प्रबंधन
- आराम से बैठें, आँखें बंद करें, 10 मिनट साँस पर ध्यान
- ध्यान भटके तो नाम दें ('सोच रहा हूँ') और साँस पर लौटें
- दिन में एक बार ध्यान से चलना या खाना
- 'अर्ज सर्फ़िंग': तलब को उठते-गिरते देखें, उस पर अमल न करें
विशेषज्ञ से कब मिलें
- थेरेपी आपकी स्थिति के लिए सही है या नहीं, इस पर बात करने के लिए परामर्श बुक कर सकते हैं
- अभ्यास से परेशान करने वाली यादें उभरें
- गंभीर डिप्रेशन या चिंता — इलाज के साथ करें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या माइंडफ़ुलनेस धार्मिक है?
इसकी जड़ें ध्यान परंपराओं में हैं, पर क्लिनिकल अभ्यास धर्मनिरपेक्ष है और हर आस्था के साथ चलता है।
क्या माइंडफ़ुलनेस इलाज की जगह ले सकता है?
यह इलाज में मदद करता है पर मध्यम–गंभीर बीमारी में उसकी जगह नहीं ले सकता।
चिकित्सा संदर्भ
इस लेख के लिए उपयोग किए गए दिशानिर्देश और आधिकारिक स्रोत।
- Depression in adults: treatment and management (NG222). National Institute for Health and Care Excellence (NICE), UK, 2022.
- LIVE LIFE: an implementation guide for suicide prevention in countries. World Health Organization, 2021.
- लेखक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MBBS, MD Psychiatry
- चिकित्सा समीक्षक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MD Psychiatry
- अंतिम समीक्षा
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
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