भारत में कई परिवार किसी के असामान्य व्यवहार पर पहले झाड़-फूँक करने वालों के पास जाते हैं।
आस्था सहारा दे सकती है, पर साइकोसिस, डिसोसिएशन और मिर्गी जैसी स्थितियों को मेडिकल इलाज चाहिए।
मुख्य बातें
- इलाज और आस्था साथ चल सकते हैं
- साइकोसिस के इलाज में देरी से नतीजा बिगड़ता है
- व्यक्ति को ज़ंजीर में बाँधना, पीटना या भूखा रखना नुकसानदेह और ग़ैरक़ानूनी है
लक्षण और संकेत
- ऐसी आवाज़ें सुनना या चीज़ें देखना जो दूसरों को नहीं
- बदली हुई चेतना, काँपना या दूसरी आवाज़ में बोलने के दौरे
- अचानक शक, आक्रामकता या अलग-थलग होना
कारण
- स्किज़ोफ़्रेनिया जैसे साइकोटिक विकार
- तनाव के बाद डिसोसिएटिव (कन्वर्ज़न) विकार
- मिर्गी, नशा या अन्य मेडिकल वजहें
जोखिम कारक
- साइकोसिस का पारिवारिक इतिहास
- गांजा या अन्य नशा
- घर में गंभीर तनाव या टकराव
प्रमाण-आधारित प्रबंधन
- वजह जानने के लिए मेडिकल और मनोचिकित्सकीय जाँच
- ज़रूरत के अनुसार एंटीसाइकोटिक, साइकोथेरेपी या मिर्गी का इलाज
- परिवार को जानकारी और तनाव कम करना
- प्रार्थना और रीति-रिवाज जारी रह सकते हैं अगर सुकून दें, नुकसानदेह तरीक़ों के बिना
विशेषज्ञ से कब मिलें
- आवाज़ें सुनना, अत्यधिक डर या कई दिन न सोना
- आक्रामकता या ख़ुद/दूसरों को ख़तरा — तुरंत देखभाल
- गोपनीय जाँच के लिए ऑनलाइन परामर्श बुक कर सकते हैं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मनोचिकित्सक धार्मिक आस्था का अनादर करते हैं?
नहीं। आस्था का सम्मान होता है; लक्ष्य व्यक्ति की आस्था के साथ बीमारी का इलाज है।
रस्म के बाद दौरे क्यों रुक गए?
कुछ तनाव वाले दौरे भरोसे से शांत हो जाते हैं, पर वजह पर काम न हो तो अक्सर लौटते हैं।
चिकित्सा संदर्भ
इस लेख के लिए उपयोग किए गए दिशानिर्देश और आधिकारिक स्रोत।
- Schizophrenia — fact sheet. World Health Organization.
- ICD-11 for Mortality and Morbidity Statistics. World Health Organization.
- लेखक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MBBS, MD Psychiatry
- चिकित्सा समीक्षक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MD Psychiatry
- अंतिम समीक्षा
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
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