बचपन में कुछ डर सामान्य है। चिंता तब है जब घबराहट तीव्र हो, हफ़्तों रहे और बच्चे को रोज़ के काम करने से रोके।
घबराए बच्चों के मन में ऐसे विचार होते हैं जिन्हें वे शब्दों में नहीं बता पाते।
मुख्य बातें
- सिर्फ़ तसल्ली से घबराहट बनी रह सकती है
- छोटे क़दमों में हिम्मत का अभ्यास आत्मविश्वास बढ़ाता है
- बच्चों के लिए CBT असरदार है
लक्षण और संकेत
- बार-बार 'क्या होगा अगर' वाले सवाल
- पेट दर्द, सिरदर्द, ख़राब नींद
- स्कूल, पार्टी या कक्षा में बोलने से बचना
कारण
- स्वभाव और पारिवारिक इतिहास
- तनाव भरी घटनाएँ: बीमारी, घर बदलना, परीक्षा
- बड़ों से घबराहट वाली प्रतिक्रिया सीखना
जोखिम कारक
- ज़रूरत से ज़्यादा सुरक्षा
- बुलिंग
- सीखने में कठिनाई
प्रमाण-आधारित प्रबंधन
- भावनाएँ स्वीकारें: 'मुझे दिख रहा है तुम डरे हुए हो'
- छोटे हिम्मत वाले क़दमों को प्रोत्साहित करें और कोशिश की तारीफ़ करें
- धीमी साँस और समस्या सुलझाना सिखाएँ
- माता-पिता के साथ CBT; दवाओं की ज़रूरत कम
विशेषज्ञ से कब मिलें
- घबराहट से स्कूल या दोस्ती पर असर
- पैनिक अटैक या माता-पिता को न छोड़ना
- बच्चे को शामिल करने से पहले माता-पिता चिंताओं पर बात करने के लिए पहले परामर्श बुक कर सकते हैं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या बच्चा बड़ा होकर ठीक हो जाएगा?
कुछ हो जाते हैं, पर बिना इलाज की घबराहट अक्सर वयस्क होने तक रहती है; जल्दी मदद बेहतर है।
क्या बच्चे को डर वाली चीज़ से बचने दूँ?
थोड़े समय बचने से राहत मिलती है पर लंबे समय डर बढ़ता है; प्यार से, साथ देकर सामना करना बेहतर है।
चिकित्सा संदर्भ
इस लेख के लिए उपयोग किए गए दिशानिर्देश और आधिकारिक स्रोत।
- Mental health of adolescents — fact sheet. World Health Organization.
- Social anxiety disorder: recognition, assessment and treatment (CG159). NICE, UK, 2013.
- लेखक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MBBS, MD Psychiatry
- चिकित्सा समीक्षक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MD Psychiatry
- अंतिम समीक्षा
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
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