हमारी शरीर की घड़ी रोशनी से सेट होती है और रात में नींद चाहती है; शिफ़्ट ड्यूटी इसके ख़िलाफ़ जाती है।
जब काम के समय की वजह से अनिद्रा या नींद लगातार बनी रहे, उसे शिफ़्ट वर्क डिसऑर्डर कहते हैं।
मुख्य बातें
- शरीर की घड़ी बदलने का सबसे मज़बूत तरीक़ा रोशनी का समय है
- काम और छुट्टी दोनों दिनों में एक तय 'एंकर' नींद मदद करती है
- नाइट शिफ़्ट के बाद नींद में गाड़ी चलाना असली ख़तरा है
लक्षण और संकेत
- दिन में कम और टूटी नींद
- शिफ़्ट के दौरान बहुत नींद आना
- चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी, एसिडिटी
कारण
- प्राकृतिक शरीर-घड़ी के उल्टे काम करना
- दिन की नींद में धूप और घर का शोर
- तेज़ी से बदलती शिफ़्ट
जोखिम कारक
- स्थायी नाइट शिफ़्ट या उल्टी दिशा में बदलती शिफ़्ट
- लंबा आना-जाना
- दिन में छोटे बच्चों की देखभाल
प्रमाण-आधारित प्रबंधन
- दिन की नींद के लिए अँधेरा, ठंडा कमरा, आई-मास्क और ईयरप्लग
- नाइट शिफ़्ट के बाद घर जाते समय काला चश्मा
- शिफ़्ट से पहले छोटी झपकी; कैफ़ीन सिर्फ़ शिफ़्ट की शुरुआत में
- संभव हो तो शिफ़्ट आगे की दिशा में बदलें (सुबह → शाम → रात)
विशेषज्ञ से कब मिलें
- दिन की नींद से काम, पढ़ाई या गाड़ी चलाने पर असर
- गाड़ी चलाते समय झपकी या बाल-बाल बचना
- उदासी या चिंता बढ़ना
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या नाइट शिफ़्ट की पूरी आदत पड़ सकती है?
ज़्यादातर लोग आंशिक रूप से ही ढल पाते हैं। रोशनी पर नियंत्रण और तय दिनचर्या से दबाव कम होता है।
क्या नींद की गोलियाँ अच्छा हल हैं?
सिर्फ़ थोड़े समय के लिए और डॉक्टर की सलाह से; व्यवहारिक उपाय ज़्यादा सुरक्षित और लंबे असर वाले हैं।
चिकित्सा संदर्भ
इस लेख के लिए उपयोग किए गए दिशानिर्देश और आधिकारिक स्रोत।
- Behavioral and psychological treatments for chronic insomnia disorder in adults: an American Academy of Sleep Medicine clinical practice guideline. Journal of Clinical Sleep Medicine, 2021.
- ICD-11 for Mortality and Morbidity Statistics. World Health Organization.
- लेखक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MBBS, MD Psychiatry
- चिकित्सा समीक्षक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MD Psychiatry
- अंतिम समीक्षा
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
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