फ़ोन तेज़ रोशनी, अनंत कंटेंट और नोटिफ़िकेशन से दिमाग़ को सतर्क रखते हैं।
बड़ी समस्या अक्सर 'रिवेंज बेडटाइम प्रोक्रैस्टिनेशन' होती है — अपना समय पाने के लिए देर तक जागना।
मुख्य बातें
- सिर्फ़ रोशनी से ज़्यादा कंटेंट उत्तेजित करता है
- फ़ोन बेडरूम के बाहर चार्ज करना सबसे असरदार क़दम है
- नाइट मोड थोड़ा मदद करता है पर समस्या हल नहीं करता
लक्षण और संकेत
- न चाहते हुए भी देर से सोना
- रात में नींद खुलने पर फ़ोन देखना
- थकी, चिड़चिड़ी सुबह
कारण
- अनंत स्क्रॉल और ऑटोप्ले डिज़ाइन
- कुछ छूट जाने का डर
- तनाव या अकेलेपन से निपटने के लिए फ़ोन
जोखिम कारक
- किशोर और विद्यार्थी
- लंबे काम के घंटे, कम ख़ाली समय
- चिंता, ADHD या उदासी
प्रमाण-आधारित प्रबंधन
- सोने से 45–60 मिनट पहले 'डिजिटल सनसेट'
- फ़ोन की जगह साधारण अलार्म घड़ी
- ग़ैर-ज़रूरी नोटिफ़िकेशन बंद, ऐप लिमिट लगाएँ
- शाम को पहले ही बिना स्क्रीन 'अपना समय' तय करें
विशेषज्ञ से कब मिलें
- बार-बार कोशिश के बावजूद कम न कर पाना
- फ़ोन से पढ़ाई, काम या रिश्तों पर असर
- दिन की नींद से काम, पढ़ाई या गाड़ी चलाने पर असर
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ब्लू-लाइट फ़िल्टर काफ़ी है?
थोड़ा मदद करता है, पर आप क्या देखते हैं और कितनी देर जागते हैं वह ज़्यादा मायने रखता है।
किशोर बच्चे को रात में फ़ोन से कैसे दूर करें?
मिलकर परिवार के नियम बनाएँ, सबके फ़ोन (माता-पिता के भी) बेडरूम से बाहर रखें और विकल्प दें।
चिकित्सा संदर्भ
इस लेख के लिए उपयोग किए गए दिशानिर्देश और आधिकारिक स्रोत।
- Behavioral and psychological treatments for chronic insomnia disorder in adults: an American Academy of Sleep Medicine clinical practice guideline. Journal of Clinical Sleep Medicine, 2021.
- Mental health of adolescents — fact sheet. World Health Organization.
- लेखक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MBBS, MD Psychiatry
- चिकित्सा समीक्षक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MD Psychiatry
- अंतिम समीक्षा
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
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