ज़्यादा सोचने का मतलब है अतीत (रूमिनेशन) या भविष्य (चिंता) के बारे में बार-बार के विचारों में अटक जाना।
यह समस्या सुलझाने जैसा लगता है, पर शायद ही कोई क़दम निकलता है — और इससे घबराहट, उदासी और ख़राब नींद बढ़ती है।
मुख्य बातें
- विचार तथ्य नहीं होते
- विचारों को ज़बरदस्ती रोकने से वे और मज़बूत होते हैं
- चिंता का तय समय और क़दम उठाना इस चक्र को तोड़ते हैं
लक्षण और संकेत
- घटनाओं और बातचीत को बार-बार दोहराना
- 'क्या हो अगर' सोचना और बुरी कल्पनाएँ
- नींद न आना, तनाव से सिरदर्द, चिड़चिड़ापन
कारण
- चिंतित स्वभाव और परफ़ेक्शनिज़्म
- अनिश्चितता और तनाव
- डिप्रेशन, GAD या OCD
जोखिम कारक
- ज़्यादा स्क्रीन और कम शारीरिक गतिविधि
- अकेलापन
- पुराने कठिन अनुभव
प्रमाण-आधारित प्रबंधन
- चिंताएँ लिखें और पूछें: क्या आज इस पर कुछ कर सकता हूँ?
- 15 मिनट का 'चिंता समय' तय करें; चिंताओं को तब तक टालें
- ध्यान वर्तमान पर लाएँ: साँस, टहलना, कोई काम
- लगातार चिंता के लिए CBT; मूल घबराहट या डिप्रेशन का इलाज
विशेषज्ञ से कब मिलें
- महीनों तक ज़्यादातर दिन चिंता
- ज़्यादा सोचने से नींद, काम या रिश्तों पर असर
- बार-बार के विचारों के साथ जाँचने या साफ़ करने की मजबूरी (OCD हो सकता है)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ज़्यादा सोचना बीमारी है?
अपने आप में नहीं, पर जब यह लगातार और परेशान करने वाला हो तो अक्सर किसी घबराहट या मूड की बीमारी का हिस्सा होता है जिसका इलाज संभव है।
क्या ध्यान (मेडिटेशन) मदद करता है?
माइंडफ़ुलनेस अभ्यास से बहुत लोगों में बार-बार सोचना कम होता है, ख़ासकर नियमित अभ्यास से।
चिकित्सा संदर्भ
इस लेख के लिए उपयोग किए गए दिशानिर्देश और आधिकारिक स्रोत।
- Generalised anxiety disorder and panic disorder in adults: management (CG113). NICE, UK, 2011.
- Anxiety disorders — fact sheet. World Health Organization.
- लेखक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MBBS, MD Psychiatry
- चिकित्सा समीक्षक
- डॉ. कुलदीप बुडानिया, MD Psychiatry
- अंतिम समीक्षा
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
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